दुर्गा मां के 101 नाम//दुर्गा मां के कौन-कौन से नाम है/दुर्गा मां दुर्गा मां के नाम

               श्रीदुर्गा अष्टोत्तरशतनाम।                      
अनन्त हैं भगवती के रूप और असंख्य हैं उनके नाम। उनके एक हजार नामों का श्रीदुर्गा सहस्रनाम तो है ही, एक सौ आठ नामों वाला यह अष्टोत्तर शतनाम भी लगभग उतना ही प्रभावशाली है और भक्ति-मुक्ति-प्रदायक है। मातेश्वरी पार्वती जी के प्रर्थना करने पर भगवती दुर्गा के ये प्रमुख एक सौ आठ नाम भगवान् शिव ने स्वयं इस क्रम से बतलाए थे-
१. सती, २. साध्वी, ३. भवहीता, ४. भवानी, ५. भवमोचनी, ६. आर्या, ७. दुर्गा, ८. जया, ९. आद्या, १०. त्रिनेत्रा, ११.शूलधारिणी, १२. पिनाक धारिणी, १३. चित्रा, १४. चन्द्रघण्टा, १५. महातपा, १६. मन:, १७. बुद्धि, १८. अहंकारा,१९. चित्तरूपा, २०. चिता, २१. चिति, २२. सर्वमन्त्रमयी, २३. सत्ता, २४. सत्यानन्द स्वरूपणी, २५. अनन्ता, २६. भाविनी,२७. भाव्या, २८. भव्या, २९. अभव्या, ३०. सदागति, ३१. शाँभवी, ३२. देवमाता, ३३. चिन्ता, ३४. रत्नप्रिया,३५. सर्वविद्या, ३६. दक्षकन्या, ३७. दक्षयज्ञविनाशिनी, ३८. अपर्णा, ३९. अनेकवर्ण, ४०. पाटला, ४१. पाटलावती,४२. पट्टारम्बरपरीधाना, ४३.
कलमंजीररंजिनी, ४४. अमेय विक्रमा, ४५. क्रूरा, ४६. सुन्दरी, ४७. सुरसुन्दरी, ४८. वनदुर्गा,
४९. मातंगी, ५०. मतंगमुनिपूजिता, ५१. ब्राह्मी, ५२. माहेश्वरी, ५३. ऐन्द्री, ५४. कौमारी, ५५. वैष्णवी, ५६. चामुण्डा,५७. वाराही, ५८. लक्ष्मी, ५९. पुरुषाकृति, ६०. विमला, ६१. उत्कर्षिनी, ६२. ज्ञाना, ६३. क्रिया, ६४. नित्या, ६५. बुद्धिदा, ६६. बला, ६७. बलहेमी, ६८. सर्ववाहनवाहना, ६९. निशुम्भशुम्भ हननी, ७१. महिषासुरमर्दिनी, ७१. मधुकैटभहन्त्री, ७२. चण्डमुण्ड विनाशिनी, ७३. सर्वअसुरविनाशा, ७४. सर्वदानवघातिनी, ७५. सत्या, ७६. सर्वास्त्रधारिणी, ७७. अनेकशस्त्रहस्ता, ७८. अनेकास्त्रधारिणी, ७९. कुमारी, ८०. एक कन्या, ८१. कैशोरी, ८२. युवती, ८३. यतिः, ८४. अप्रौढ़ा, ८५. प्रौढ़ा, ८६. वृद्धमाता, ८७. बलप्रदा, ८८. महोदरी, ८९. मुक्तकेशी, ९०, घोररूपा, ९१. महाबला,९२.अग्निज्वाला, ९३. रौद्रमुखी, ९४. कालरात्रि, ९५. तपस्विनी, ९६. नारायणी, ९७. भद्रकाली, ९८. विष्णुमाया, ९९. जलोदरी,
१००. शिवदूती, १०१. कराली, १०२. अनन्ता, १०३. परमेश्वरी, १०४. कात्यायनी, १०५. सावित्री, १०६. हृत्यांग, १०७. ब्रह्मवादिनी, १०८. सर्वशास्त्रमयी ।
इस अष्टोत्तर शतनाम की फलश्रुति बतलाते हुए भगवान् शिव ने कहा- हे पार्वती ! जो साधक इस दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम का नित्य पाठ करता है उसके लिए तीनों लोकों में कुछ भी असाध्य नहीं रह जाता। वह साधक धन-धान्य, पुत्र-पुत्री, हाथी-घोड़ा
तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त करता है और आवागन के चक्र से मुक्त हो जाता है। हे पार्वती! जो आराधक नवरात्रों में कुमारी पूजन करके भगवती दुर्गा की पूजा-आराधना और हवन करने के पश्चात् इन एक सौ आठ नामों का पाठ करता है उसे सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।

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