Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी कब है? जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त,महत्व और पूरी कथा

नरक चतुर्दशी :–Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी कब है? जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त,महत्व और पूरी कथा 

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी का दिन नरक चतुर्दशी का पर्व माना गया है। इस दिन नरक से मुक्ति पाने के लिए प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) पौधा के सहित जल से स्नान करना चाहिए। इस दिन शाम को यमराज के लिए दीपदान करना चाहिए। कहा जाता है इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण जी ने नरकासुर नामक दैत्य का संहार किया था।



नरक चतुर्दशी 2022 की पूजा विधि

नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहन लें। 

नरक चतुर्दशी के दिन यमराज, श्री कृष्ण, काली माता, भगवान शिव, हनुमान जी और विष्णु जी के वामन रूप की विशेष पूजा की जाती है। 

घर के ईशान कोण में इन सभी देवी देवताओं । की प्रतिमा स्थापित करके विधि पूर्वक पूजन करें। 

देवताओं के सामने धूप दीप जलाएं, कुमकुम का तिलक लगाएं और मंत्रो का जाप करें। 

नरक चतुर्दशी की कथा

प्राचीन समय में 'रन्तिदेव' नामक राजा था। वह पहले जन्म में धर्मात्मा,दानी था। उन्हीं पूर्व-कृत कर्मों से, इस जन्म में भी राजा ने अपार दानादि देकर सत्कार्य किए। जब उसका अन्त समय आया तब यमराज के दूत उन्हें लेने आये। बार-बार राजा को लाल-लाल आँखें निकालकर कह रहे थे-राजन्! नरक में चलो, तुम्हें वहीं चलना पड़ेगा। इस पर राजा घबड़ायाऔर नरक में चलने का कारण पूछा। यम के दूतों ने कहा-राजन्! आपने जो दान-पुण्य किया हैं, उसे तो समस्त विश्व जानता है किन्तु पाप को केवल भगवान और धर्मराज ही जानते हैं।

राजा बोला-उस पाप को मुझे भी बताओ जिससे उसका निवारण कर सकूँ। यमदूत बोले-एक बार तेरे द्वार से भूख से व्याकुल एक ब्राह्मण लौट गया था, इससे तुझे नरक में जाना पड़ेगा। यह सुन राजा ने यमदूतों से विनती की कि मेरी आयु एक वर्ष बढ़ा दी जाए। इस बात को दूतों ने बिना सोच-विचार किये ही स्वीकार कर लिया और राजा की आयु एक वर्ष बढ़ा दी गई। यमदूत चले गये। राजा ने ऋषियों के पास जाकर इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। ऋषियों ने बतलाया- राजन्! तुम कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को व्रत रखकर भगवान कृष्ण का पूजन करना, ब्राह्मण-भोजन कराना, तथा दान देकर सब अपराध सुनाकर क्षमा माँगना, तब तुम पाप-मुक्त हो जाओगे। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी आने पर राजा ने नियमपूर्वक व्रत रखा और अन्त में विष्णुलोक को पाया।

                    छोटी दीवाली

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चौदस को छोटी दीवाली होती है। दिन में आटे,तेल, हल्दी का उबटन बनाएँ और उसे लगायें। बाद में लोग नहाएँ। पट्टे केनीचे तेल का दीया जलाकर गर्म पानी से सिर सहित नहायें।भोजन करने से पहले इस प्रकार पूजा करें-एक थाली में पूजा की सामग्री एक कच्चा दीया, एक चौमुखा दीया और तेरह छोटे दीये लगाएँ। उनमें तेल बत्ती डाल दें। पूजा की सामग्री और दीये, गद्दी के लिए और घर के लिए अलग-अलग जलायें। जिनकी पूजा कर दीये पर जल, रोली,चावल, गुड़, धूप, अबीर, गुलाल, फूल, चार सुहाली, दक्षिणा चढ़ायें। शाम को पहले गद्दी की पूजा करें। बाद में घर आकर पूजन करें। सारी सामग्री चढ़ा दें। घर पर भी इसी प्रकार पूजा करने के बाद सारे दीये जलाकर सब कमरों में, रसोई में, चौक में, सीढ़ी में रख दें। गणेशजी व लक्ष्मीजी के आगे धूप कर दें।

नरक चतुर्दशी 2022  किस दिन और किस टाइम मनाए:–तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 03 मिनट से हो रही है। वहीं चतुर्दशी तिथि का समापन 24 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार नरक चतुर्दशी 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

               क्यों मनाई जाती हैं नरकचतुर्थी 

ऐसी मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन यमदेव की पूजा करने अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। साथ ही सभी पापों का नाश होता है, इसलिए शाम के समय यमदेव की पूजा करें और घर के दरवाजे के दोनों तरफ दीप जरूर जलाएं। की प्रतिमा स्थापित करके विधि पूर्वक पूजन करें। 

देवताओं के सामने धूप दीप जलाएं, कुमकुम का तिलक लगाएं और मंत्रो का जाप करें। 

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