सर्द हवाएं संग ये लाए
सूरज चाचा बादलों मे छुपकर
देर से अपना मुख दिखलाए
ठंड जैसे ही बढ़ती जाए
चाय, पकोड़े मन को भाएँ
दस्ताने, जैकेट और जर्सी
माँ हमको रोज़ पहनाए
पहने जब हम गरम कपड़े
दिखने लगे मोटे- तगड़े
मूँगफली जैबो मे भरकर
स्वाद ले लेकर हम खाए
जनवरी के माह मे फिर
सर्दियों की छुट्टी पड़ जाए
हम बच्चे खुशी- खुशी अपनी
नानी के घर मौज उड़ाए....
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