2022 धनतेरस कथा।।Dhanteras katha

      

2022 Dhanteras Katha: धनतेरस क्यों मनाते हैं।। क्या है धनतेरस की कहानी जानें।।

                      धन तेरस 

धनतेरस कैसे मनाएं। क्या करें पूजन कैसे करे

कार्तिक लगते की तेरस को धन तरस कहते हैं। धन तेरस के दिन एक मिट्टी का दीपक बना लें। बाद में रात को जीमने के बाद सिर्फ औरतें दीपक का पूजन करें और दीपक में तेल डाल उसमें चार बत्ती एक कोड़ी छेद/फर दीपक जला दें। जल का छींटा दें, रोली, चावल, चार सुहाली,थोड़ा-सा गुड़, फूल, दक्षिणा, धूप रख दें। चार फेरी देकर बाद में दीपक उठाकर अपने घर के आगे रख दें। सुबह दीपक में से कोड़ी निकालकर रखदें।

यदि धन तेरस के दिन आपके घर में पुराना बर्तन हो तो उसको देकर नया बर्तन ले आयें। हो सके तो चाँदी का बर्तन भी मँगवाना चाहिए 




आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं 


                  धनतेरस की पौराणिक कथा 

एक दिन भगवान विष्णु मृत्यु लोक में विचरण करने के लिए लक्ष्मी सहित भूमण्डल पर आये। कुछ देर बाद लक्ष्मी से बोले-मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूँ तुम उधर मत देखना। यह कह ज्योंही भगवान ने राह पकड़ी त्योंही लक्ष्मी पीछे-पीछे चल पड़ीं। कुछ ही दूर पर सरसों का खेत दिखाई दिया। उसके बाद ऊख तोड़कर चूसने लगीं। तत्क्षण भगवान लौटआये और यह देखकर लक्ष्मी पर क्रोधित होकर शाप दिया कि जिस किसान का यह खेत है 12 वर्ष तक उसकी सेवा करो। ऐसा कहकर भगवान क्षीरसागर चले गये और लक्ष्मी ने किसान के यहाँ जाकर उसे धन-धान्य से पूर्ण कर दिया। तत्पश्चात् 12 वर्ष के बाद लक्ष्मी जी जाने के लिए तैयार हुई किन्तु किसान ने रोक लिया। भगवान जब किसान के यहाँ लक्ष्मी को बुलाने आए तो किसान ने लक्ष्मी को नहीं जाने दिया। तब भगवान बोले तुम परिवार सहित गंगा जाकर स्नान करो और इन कौड़ियों को भी जल में छोड़ देना। जब तक तुम नहीं लौटोगे तब तक मैं नहीं जाऊँगा। किसान ने ऐसा ही किया। जैसे ही उसने गंगा में कौढ़ियाँ डालीं वैसे हीगंगा में से चार चतुर्भुज निकले और कोड़ियाँ लेकर चलने को उद्यत हुए।

जब किसान ने ऐसा आश्चर्य देखा तो गंगा जी से पूछा कि-ये चार भुजाएँ किसकी थीं? गगा जी ने बताया कि-हे किसान! वे चारों हाथ मेरे ही थे, तूने जो कौढ़ियाँ मुझे भेंट की हैं, वे किसकी दी हुई हैं? किसान बोला- मेरे घर में दो सज्जन आए हैं, उन्होंने ने ही दी हैं।

गंगाजी बोलीं-तुम्हारे घर जो स्त्री है वह लक्ष्मी हैं और पुरुष विष्णु भगवान हैं। तुम लक्ष्मी को न जाने देना, नहीं तो पुनः उसी भांति निर्धन हो जाओगे। यह सुन जब वह घर लौटा तो भगवान से बोला कि-मैं लक्ष्मीजी को नहीं जाने दूँगा। तब भगवान ने किसान को समझाया कि इनको मेरा श्राप था जो कि बारह वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही हैं। फिर लक्ष्मी चंचल हैं। इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके। किसान ने हठपूर्वक पुनः कहा-नहीं, मैं लक्ष्मीजी को अब नहीं जाने दूँगा। इस पर लक्ष्मीजी ने स्वयं कहा कि हे किसान! यदि तुम मुझे रोकना चाहते हो तो सुनो। कल तेरस है, तुम अपना घर स्वच्छ रखो। रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना, तब मैं तुम्हारे घर आऊँगी। उस समय तुम मेरी पूजा करना किन्तु मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूँगी। किसान ने कहा- ठीक है, मैं ऐसा ही करूँगा। इतना कहा और सुन लेने के बाद लक्ष्मीजी दशों दिशाओं में फैल गई, भगवान देखते ही रह गये। दूसरे दिन किसान ने लक्ष्मीजी के कथनानुसार पूजन किया। उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। इसी भाँति वह हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मीजी की पूजा करने लगा। उस किसान को ऐसा करते देखकर कितने ही लोगों ने पूजा करना शुरू कर दिया।

अपमृत्यु (दुर्घटना) टालने का मंत्र

धनतेरस के दिन परिवार का प्रत्येक सदस्य अपने नाम से दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके यमराज की प्रसन्नता के लिए दीपक जलाकर निम्न मंत्र पढ़ें-

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।

त्रयोदश्यां दीपदानात् पूर्यजः प्रीयतां मम॥

[ मृत्यु काल में जंजीर और दण्ड धारण किये हुये और भैंसे पर सवार सूर्य पुत्र यमराज मैं आपको त्रयोदशी के दिन दीपदान कर रहा हूँ। अपमृत्यु(दुर्घटना) से मेरी रक्षा कीजिये, इससे मुझे बचाइये। ]

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