कुछ मौसम सिर्फ बारिश नहीं लाते,
कुछ मौसम दिल के अधूरे किस्से भी जगा जाते हैं…
“सिसकता सावन” उन्हीं जज़्बातों की कहानी है।
"सिसकता सावन "
सावन आग बरसाने आया मेरे आंगन में।
प्यार के बिना सूखा हुआ था मेरा कानन ये,
सावन की ठंडी बूंदों से तृप्त हुआ मेरा दामन ये!
ऐ बादल प्रदेश से आए हो क्या।
मेरे रूठे पिया का कोई संदेश लाए हो क्या,
बरसो बीत गए उनको, मुझको भूला दिया है क्या!
अब तो आ जाओ सावन भी जाने वाला है।
दिल उमंगों से भरा हुआ एक प्याला है,
मेरे दिल का दर्द आंखों से छलकने वाला हैं!
मेरे सब्र का तुम मत लो इम्तहान।
मैं टूटकर बिखर जाऊ इतना भी मत तान,
तुम्हारे दर्शनों के लिए अटकी हुई मेरी जान!
ज़िन्दगी बीत जाने के बाद आए तो क्या आना ।
उमंगों भरे सावन के बीत जाने के बाद आए तो क्या आना,
मेरे मरने के बाद खुशियां लाए तो क्या आना!
लेखक:- नीता सिंह
💔 कविता का भावार्थ
यह कविता एक ऐसे व्यक्ति के दिल की आवाज़ है
जो अपने प्रिय के इंतजार में हर मौसम को जी रहा है।
सावन यहाँ सिर्फ बारिश नहीं,
बल्कि उम्मीद, दर्द और अधूरी मोहब्बत का प्रतीक है।
बारिश = दिल का दर्द
बादल = संदेश की उम्मीद
सावन = इंतजार का समय
जब प्यार साथ नहीं होता,
तो खुशियों का मौसम भी अधूरा लगने लगता है।
🌧️ खास लाइनें (Highlight Lines)
“मेरे दिल का दर्द आंखों से छलकने वाला हैं!”
“मेरे सब्र का तुम मत लो इम्तहान…”
“मेरे मरने के बाद खुशियां लाए तो क्या आना!”
📌 Conclusion
“सिसकता सावन” सिर्फ एक कविता नहीं,
बल्कि उन सभी दिलों की कहानी है
जो किसी के इंतजार में चुपचाप टूटते रहते हैं।

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